मुक़्क़मल मोहब्बत
यु तो मैंने बहुत से लोगो की रचनाएँ पढ़ी हैं ! कई कवियों की कविताएं, लेखकों की कहानियाँ, और उपन्यासकारों के उपन्यास ! पर इन सब में सिर्फ दो ही लेखिकाएं ऐसी हैं जिन्होंने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया ! इनमे से एक हैं पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम और दूसरी हैं पूजा उपाध्याय ! मैंने अमृता प्रीतम के बहुत सारे लघु उपन्यास और कई कविताएं पढ़ी हैं ! और यकीन मानिये उनकी हर रचना अपने आप में बेहतरीन और गजब की रूहानियत लिए हुए है ! मोहब्बत को जितनी शिद्दत से उन्होंने जिया हैं , मुझे नहीं लगता किसी और ने कभी उतनी शिद्दत से इस अहसास को महसूस किया हो ! अमृता जी की एक कविता "मैं तैनू फिर मिलांगी" मुझे इतनी पसंद हैं की मैं लफ्ज़ो में बयां नहीं कर सकती ! इस कविता में वो अपने मेहबूब से अगले जन्म में जिस्म बदल कर फिर मिलने का वादा करती हैं ! उनके जैसी मोहब्बत आज के ज़माने में भला कौन कर सकता हैं ! वो प्यार करती थी साहिर से, इस प्यार को वो अंजाम तो नए दे पाई पर अपनी लेखनी में जैसे उन्होंने अपनी इस मोहब्बत को मुकम्मल कर दिया ! अपनी किताब एक थी अनीता में उन्होंने अपना एक राज ज़ाहिर किया हैं अपनी कहानी की नायिका अनीता के ज़रिये, की कैसे जब साहिर उनसे मिलने आते थे तो कितनी ही सिगरेट पी जाया करते थे ! अमृता सिगरेट तो नहीं पीती थी, पर साहिर के जाने के बाद वो बची हुई सिगरेट अपनी उंगलियों में फ़साती और उन्हें फिर से सुलगा कर पिया करती और ऎसा करके वो साहिर को फिर से अपने आस पास महसूस करती थी !साहिर का जन्मदिन भी वो ऐसे ही मनाती थी केक बनाती अपने कमरे में आके केक के 2 पीस काटती और सिगरेट पीते पीते वो केक के दोनों ही टुकड़े ख़तम करती थी और ऎसा करके वो दिनभर खुश रहती की उन्होंने साहिर का जन्मदिन मनाया !वैसे तो मुझे सिगरेट शराब पिने वाले लोग कभी पसंद नहीं आये पर उनका मोहब्बत को इस तरह महसूस करना मेरी रूह को छू गया ! अमृता प्रीतम के ख़याल जो उनकी किताबों में कैद हैं अक्सर पढ़ने वालो के दिलो दिमाग़ में एक तूफान पैदा कर देते हैं ! यु तो अमृता जी के बारे में कहने को बहुत कुछ हैं पर आज के लिए इतना ही काफ़ी हैं बाकि फिर कभी !


















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